एतेन देवा युधि दानवाश्च; यक्षा भुजंगाः पिशिताशनाश्च ।
गन्धर्वविद्याधरकिंनराश्च; सहस्रशो राघव संप्रभग्नाः ॥
एतेन देवा युधि दानवाश्च; यक्षा भुजंगाः पिशिताशनाश्च ।
गन्धर्वविद्याधरकिंनराश्च; सहस्रशो राघव संप्रभग्नाः ॥
अन्वयः
राघव Raghava, एतेन by him, युधि in war, देवाः Devas, दानवाश्च and Danavas, यक्षाः yaksha, भुजङ्गाः Nagas, पिशिताशनाश्च ogres, गन्धर्व Gandharvas, विद्याधर Vidyadharas, किन्नरैश्च Kinneras, सहस्रशः in thousands, सम्प्रभग्नाः were all defeated.M N Dutt
O Rāghava, this one in battle has brought down Dānavas and Yakşas and Serpents' and flesh-feeders and Gandharvas and Vidyādharas and Pannagas by thousands. १. Bhujanga:-semi-divine serpents. २. Semi-divine serpents.Summary
"O Raghava! In war Devas, Danavas, Yakshas, Nagas, ogres, Gandharvas, Vidydharas, Kinneras in thousands were defeated by him."पदच्छेदः
| एतेन | एतद् (३.१) |
| देवा | देव (१.३) |
| युधि | युध् (७.१) |
| दानवाश्च | दानव (१.३)–च (अव्ययः) |
| यक्षा | यक्ष (१.३) |
| भुजंगाः | भुजंग (१.३) |
| पिशिताशनाश्च | पिशित–अशन (१.३)–च (अव्ययः) |
| गन्धर्वविद्याधरकिंनराश्च | गन्धर्व–विद्याधर–किंनर (१.३)–च (अव्ययः) |
| सहस्रशो | सहस्रशस् (अव्ययः) |
| राघव | राघव (८.१) |
| संप्रभग्नाः | संप्रभग्न (√संप्र-भञ्ज् + क्त, १.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ते | न | दे | वा | यु | धि | दा | न | वा | श्च |
| य | क्षा | भु | जं | गाः | पि | शि | ता | श | ना | श्च |
| ग | न्ध | र्व | वि | द्या | ध | र | किं | न | रा | श्च |
| स | ह | स्र | शो | रा | घ | व | सं | प्र | भ | ग्नाः |