अन्वयः
एषः if he, एवम् in that way, नित्यशः every day, प्रजाः created beings, भक्षयिष्यतियदि if consumes, अचिरेण soon, कालेनैव in course of time, लोकः world, शून्यः empty, भविष्यति will become.
Summary
"If he consumes created beings every day like that, in the course of time the world will be devoid of beings."
पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| प्रजा | प्रजा (२.३) |
| यदि | यदि (अव्ययः) |
| त्वेष | तु (अव्ययः)–एतद् (१.१) |
| भक्षयिष्यति | भक्षयिष्यति (√भक्षय् लृट् प्र.पु. एक.) |
| नित्यशः | नित्यशस् (अव्ययः) |
| अचिरेणैव | अचिर (३.१)–एव (अव्ययः) |
| कालेन | काल (३.१) |
| शून्यो | शून्य (१.१) |
| लोको | लोक (१.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | वं | प्र | जा | य | दि | त्वे | ष |
| भ | क्ष | यि | ष्य | ति | नि | त्य | शः |
| अ | चि | रे | णै | व | का | ले | न |
| शू | न्यो | लो | को | भ | वि | ष्य | ति |