ध्रुवं लोकविनाशाय पौरस्त्येनासि निर्मितः ।
तस्मात्त्वमद्य प्रभृति मृतकल्पः शयिष्यसि ।
ब्रह्मशापाभिभूतोऽथ निपपाताग्रतः प्रभोः ॥
ध्रुवं लोकविनाशाय पौरस्त्येनासि निर्मितः ।
तस्मात्त्वमद्य प्रभृति मृतकल्पः शयिष्यसि ।
ब्रह्मशापाभिभूतोऽथ निपपाताग्रतः प्रभोः ॥
अन्वयः
लोकविनाशाय for the destruction of the universe, पौलस्त्येन by Paulastya, निर्मितःअपि begotten, ध्रुवम् surely, तस्मात् therefore, त्वम् you, अद्यप्रभृति remain from today, मृतकल्पः sleep like a dead one, शयिष्यसे lying down.M N Dutt
Forsooth for compassing the destruction of creatures, have you been begot by Paulasta* Therefore from this day forth, you shall lie down as one dead. *ViSravana.Summary
"Surely you are begotten by Paulastya for the destruction of the universe. Therefore, remain sleeping like a dead one from today, ' said Brahma and cursed him."पदच्छेदः
| ध्रुवं | ध्रुवम् (अव्ययः) |
| लोकविनाशाय | लोक–विनाश (४.१) |
| पौलस्त्येनासि | पौलस्त्य (३.१)–असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| निर्मितः | निर्मित (√निः-मा + क्त, १.१) |
| तस्मात् | तस्मात् (अव्ययः) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| प्रभृति | प्रभृति (अव्ययः) |
| मृतकल्पः | मृत (√मृ + क्त)–कल्प (१.१) |
| शयिष्यसि | शयिष्यसि (√शी लृट् म.पु. ) |
| ब्रह्मशापाभिभूतो | ब्रह्मन्–शाप–अभिभूत (√अभि-भू + क्त, १.१) |
| ऽथ | अथ (अव्ययः) |
| निपपाताग्रतः | निपपात (√नि-पत् लिट् उ.पु. )–अग्रतस् (अव्ययः) |
| प्रभोः | प्रभु (६.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध्रु | वं | लो | क | वि | ना | शा | य | पौ | र | स्त्ये | ना |
| सि | नि | र्मि | तः | त | स्मा | त्त्व | म | द्य | प्र | भृ | ति |
| मृ | त | क | ल्पः | श | यि | ष्य | सि | ब्र | ह्म | शा | पा |
| भि | भू | तो | ऽथ | नि | प | पा | ता | ग्र | तः | प्र | भोः |