अन्वयः
राजन् king, अहम् I, अदृत्य awakened, त्वया by you, किमर्थम् for what purpose, विबोधितः tell me, अद्य you may, ते to you, कस्मात् with the task, भयम् fear, शंस doubt, प्रेतः to be ceased, भविष्यति I wish to know.
Summary
"O King! For what purpose have I been awakened by you? Whom are you fearing? I wish to know who is to be ceased in life?"
पदच्छेदः
| किमर्थम् | किमर्थम् (अव्ययः) |
| अहम् | मद् (१.१) |
| आदृत्य | आदृत्य (√आ-दृ + ल्यप्) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| राजन् | राजन् (८.१) |
| प्रबोधितः | प्रबोधित (√प्र-बोधय् + क्त, १.१) |
| शंस | शंस (√शंस् लोट् म.पु. ) |
| कस्माद् | क (५.१) |
| भयं | भय (१.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| ऽस्ति | अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| को | क (१.१) |
| ऽद्य | अद्य (अव्ययः) |
| प्रेतो | प्रेत (√प्र-इ + क्त, १.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| कि | म | र्थ | म | ह | मा | दृ | त्य |
| त्व | या | रा | ज | न्प्र | बो | धि | तः |
| शं | स | क | स्मा | द्भ | यं | ते | ऽस्ति |
| को | ऽद्य | प्रे | तो | भ | वि | ष्य | ति |