अथासीनस्य पर्यङ्के कुम्भकर्णो महाबलः ।
भ्रातुर्ववन्दे चरणां किं कृत्यमिति चाब्रवीत् ।
उत्पत्य चैनं मुदितो रावणः परिषस्वजे ॥
अथासीनस्य पर्यङ्के कुम्भकर्णो महाबलः ।
भ्रातुर्ववन्दे चरणां किं कृत्यमिति चाब्रवीत् ।
उत्पत्य चैनं मुदितो रावणः परिषस्वजे ॥
अन्वयः
अथ and then, महाबलः endowed with extraordinary might, कुम्भकर्णः Kumbhakarna, पर्यङ्के getting up, आसीनस्य from his seat, भ्रातुः brother, चरणौ feet, ववन्दे clasped, किम् what, कृत्यम् task to do, इति च now, अब्रवीत् said.M N Dutt
Then the exceedingly mighty Kumbhakarņa saluted the feet of his brother and said, "What did you say ?"Summary
Getting up from his seat, Kumbhakarna endowed with extraordinary might bowed down and clasped his brother's feet and asked him, what task he had to do?पदच्छेदः
| अथासीनस्य | अथ (अव्ययः)–आसीन (√आस् + क्त, ६.१) |
| पर्यङ्के | पर्यङ्क (७.१) |
| कुम्भकर्णो | कुम्भकर्ण (१.१) |
| महाबलः | महत्–बल (१.१) |
| भ्रातुर् | भ्रातृ (६.१) |
| ववन्दे | ववन्दे (√वन्द् लिट् प्र.पु. एक.) |
| चरणौ | चरण (२.२) |
| किं | क (१.१) |
| कृत्यम् | कृत्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| चाब्रवीत् | च (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| उत्पत्य | उत्पत्य (√उत्-पत् + ल्यप्) |
| चैनं | च (अव्ययः)–एनद् (२.१) |
| मुदितो | मुदित (√मुद् + क्त, १.१) |
| रावणः | रावण (१.१) |
| परिषस्वजे | परिषस्वजे (√परि-स्वज् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | सी | न | स्य | प | र्य | ङ्के | कु | म्भ | क | र्णो |
| म | हा | ब | लः | भ्रा | तु | र्व | व | न्दे | च | र | णां |
| किं | कृ | त्य | मि | ति | चा | ब्र | वीत् | उ | त्प | त्य | चै |
| नं | मु | दि | तो | रा | व | णः | प | रि | ष | स्व | जे |