अन्वयः
रावणः Ravana, उत्पत्य getting up, एनम् in that way, परिषस्वजे filled with joy, भ्रात्रा brother, परिष्वक्तः embraced, यथावत् similarly, अभिनन्दितः greeted, सःकुम्भकर्णः that Kumbhakarna, शुभम् auspicious, दिव्यम् wonderful, वरासनम् excellent seat, प्रतिपेदे occupied.
Summary
Getting up from his seat Ravana embraced and greeted Kumbhakarna. So also, he duly rejoiced and occupied the seat.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| भ्रात्रा | भ्रातृ (३.१) |
| सम्परिष्वक्तो | सम्परिष्वक्त (√सम्परि-स्वज् + क्त, १.१) |
| यथावच्चाभिनन्दितः | यथावत् (अव्ययः)–च (अव्ययः)–अभिनन्दित (√अभि-नन्द् + क्त, १.१) |
| कुम्भकर्णः | कुम्भकर्ण (१.१) |
| शुभं | शुभ (२.१) |
| दिव्यं | दिव्य (२.१) |
| प्रतिपेदे | प्रतिपेदे (√प्रति-पद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वरासनम् | वर–आसन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | भ्रा | त्रा | सं | प | रि | ष्व | क्तो |
| य | था | व | च्चा | भि | न | न्दि | तः |
| कु | म्भ | क | र्णः | शु | भं | दि | व्यं |
| प्र | ति | पे | दे | व | रा | स | नम् |