अन्वयः
अस्मिन् that alone, काले time, यत् that, युक्तम् which is proper, तत् that, इदानीम् to do now, विधीयताम् you may speak, गतम् past, न अनुशोचन्ति not think of again, गतम् past, गतमेवहि is past.
Summary
"You may speak of only what is proper to do now. Do not think of the past as it is gone."
पदच्छेदः
| अस्मिन् | इदम् (७.१) |
| काले | काल (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| यद् | यद् (१.१) |
| युक्तं | युक्त (१.१) |
| तद् | तद् (१.१) |
| इदानीं | इदानीम् (अव्ययः) |
| विधीयताम् | विधीयताम् (√वि-धा प्र.पु. एक.) |
| ममापनयजं | मद् (६.१)–अपनय–ज (२.१) |
| दोषं | दोष (२.१) |
| विक्रमेण | विक्रम (३.१) |
| समीकुरु | समीकुरु (√समी-कृ लोट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | स्मि | न्का | ले | तु | य | द्यु | क्तं |
| त | दि | दा | नीं | वि | धी | य | ताम् |
| म | मा | प | न | य | जं | दो | षं |
| वि | क्र | मे | ण | स | मी | कु | रु |