वधेन ते दाशरथेः सुखावहं; सुखं समाहर्तुमहं व्रजामि ।
निहत्य रामं सहलक्ष्मणेन; खादामि सर्वान्हरियूथमुख्यान् ॥
वधेन ते दाशरथेः सुखावहं; सुखं समाहर्तुमहं व्रजामि ।
निहत्य रामं सहलक्ष्मणेन; खादामि सर्वान्हरियूथमुख्यान् ॥
अन्वयः
दाशरथेः Dasaratha's son, वधेन: by killing, तव: your, सुखावहम् I will make you happy, जयम् victorious, आहर्तुम् will do, अहम् I, यतिष्ये: attempt, लक्ष्मणेनसह: with Lakshmana, रामम् Rama also, हत्वा: on killing, सर्वान् all, हरियूथमुख्यान् Vanara leaders, खादामि: will consume.M N Dutt
I go for securing felicity us huring in pleasures plenteous flowing from the destruction of Dasaratha's son. And slaying Rāma along with Lakşmaņa, I shall eat up all the foremost of monkey-bands.Summary
"By killing Rama, I will try to make you happy and victorious. On killing Rama and Lakshmana like that I will consume the Vanara leaders."पदच्छेदः
| वधेन | वध (३.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| दाशरथेः | दाशरथि (६.१) |
| सुखावहं | सुख–आवह (२.१) |
| सुखं | सुख (२.१) |
| समाहर्तुम् | समाहर्तुम् (√समा-हृ + तुमुन्) |
| अहं | मद् (१.१) |
| व्रजामि | व्रजामि (√व्रज् लट् उ.पु. ) |
| निहत्य | निहत्य (√नि-हन् + ल्यप्) |
| रामं | राम (२.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| लक्ष्मणेन | लक्ष्मण (३.१) |
| खादामि | खादामि (√खाद् लट् उ.पु. ) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| हरियूथमुख्यान् | हरि–यूथ–मुख्य (२.३) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | धे | न | ते | दा | श | र | थेः | सु | खा | व | हं |
| सु | खं | स | मा | ह | र्तु | म | हं | व्र | जा | मि | |
| नि | ह | त्य | रा | मं | स | ह | ल | क्ष्म | णे | न | |
| खा | दा | मि | स | र्वा | न्ह | रि | यू | थ | मु | ख्यान् | |
| ज | त | ज | ग | ग | |||||||