अन्वयः
पुनस्तात् again, त्वम् you, वैदेहीम् Vaidehi, लब्ध्वा having got, किम् why, सम्प्रजल्पसि talking so, इच्छसियदि desire so, तदा then, सीता Sita, ते you, वशगा submit to, भविष्यति will.
M N Dutt
Having already obtained Vaidehi, why did you delay ? If you wish it, Sītā shall come under your control.
Summary
"Having got Vaidehi, why are you talking like that? Sita will submit to you if you desire."
पदच्छेदः
| लब्ध्वा | लब्ध्वा (√लभ् + क्त्वा) |
| पुनस्तां | पुनर् (अव्ययः)–तद् (२.१) |
| वैदेहीं | वैदेही (२.१) |
| किमर्थं | किमर्थम् (अव्ययः) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| प्रजल्पसि | प्रजल्पसि (√प्र-जल्प् लट् म.पु. ) |
| यदेच्छसि | यदा (अव्ययः)–इच्छसि (√इष् लट् म.पु. ) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| सीता | सीता (१.१) |
| वशगा | वश–ग (१.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| भविष्यति | भविष्यत् (√भू + कृत्, ७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ल | ब्ध्वा | पु | न | स्तां | वै | दे | हीं |
| कि | म | र्थं | त्वं | प्र | ज | ल्प | सि |
| य | दे | च्छ | सि | त | दा | सी | ता |
| व | श | गा | ते | भ | वि | ष्य | ति |