तद्वानरानीकमतिप्रचण्डं; दिशो द्रवद्भिन्नमिवाभ्रजालम् ।
स कुम्भकर्णः समवेक्ष्य हर्षा;न्ननाद भूयो घनवद्घनाभः ॥
तद्वानरानीकमतिप्रचण्डं; दिशो द्रवद्भिन्नमिवाभ्रजालम् ।
स कुम्भकर्णः समवेक्ष्य हर्षा;न्ननाद भूयो घनवद्घनाभः ॥
अन्वयः
भिन्नम् scattered, अभ्रजालम्इव clouds like, दिशः directions, द्रवत् running, अतिप्रचण्डम् notorious, तत् वानरानीकम् that Vanara troops, समवेक्ष्य perceiving, घनाभः heavy cloud, सःकुम्भकर्णः that Kumbhakarna, हर्षात् laughing, घनवत् cloud like, भूयः emitted, नाद roared.M N Dutt
Seeing that terrific host of monkeys scattering in all directions, like clouds broken through (by winds), Kumbhakarņa possessed the splendour of clouds, from joy, emitted roars like clouds.Summary
Heavy cloud like Kumbhakarna, a notorious one, perceiving the Vanara troops scattered like clouds in all directions emitted roar, laughing aloud.पदच्छेदः
| तद् | तद् (१.१) |
| वानरानीकम् | वानर–अनीक (१.१) |
| अतिप्रचण्डं | अति (अव्ययः)–प्रचण्ड (१.१) |
| दिशो | दिश् (२.३) |
| द्रवद् | द्रवत् (√द्रु + शतृ, १.१) |
| भिन्नम् | भिन्न (√भिद् + क्त, १.१) |
| इवाभ्रजालम् | इव (अव्ययः)–अभ्र–जाल (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| कुम्भकर्णः | कुम्भकर्ण (१.१) |
| समवेक्ष्य | समवेक्ष्य (√समव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| हर्षान् | हर्ष (५.१) |
| ननाद | ननाद (√नद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भूयो | भूयस् (अव्ययः) |
| घनवद् | घन–वत् (अव्ययः) |
| घनाभः | घन–आभ (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्वा | न | रा | नी | क | म | ति | प्र | च | ण्डं |
| दि | शो | द्र | व | द्भि | न्न | मि | वा | भ्र | जा | लम् |
| स | कु | म्भ | क | र्णः | स | म | वे | क्ष्य | ह | र्षा |
| न्न | ना | द | भू | यो | घ | न | व | द्घ | ना | भः |