शयामहे वा निहताः पृथिव्यामल्पजीविताः ।
दुष्प्रापं ब्रह्मलोकं वा प्राप्नुमो युधि सूदिताः ।
संप्राप्नुयामः कीर्तिं वा निहत्य शत्रुमाहवे ॥
शयामहे वा निहताः पृथिव्यामल्पजीविताः ।
दुष्प्रापं ब्रह्मलोकं वा प्राप्नुमो युधि सूदिताः ।
संप्राप्नुयामः कीर्तिं वा निहत्य शत्रुमाहवे ॥
अन्वयः
अल्पजीविताः life span is reduced, निहताः having been killed, पृथिव्याम् in the world, शयामहेवाfall, युधिसूदिता killed in war, दुष्प्रापम् difficult to attain, ब्रह्मलोकम् world of Brahma, प्राप्नुयामः च will attain.Summary
"If we are killed in war, fallen dead on the ground and our life span is reduced, we will attain the realm of Brahma which is difficult to attain."पदच्छेदः
| शयामहे | शयामहे (√शी लट् उ.पु. द्वि.) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| निहताः | निहत (√नि-हन् + क्त, १.३) |
| पृथिव्याम् | पृथिवी (७.१) |
| अल्पजीविताः | अल्प–जीवित (१.३) |
| दुष्प्रापं | दुष्प्राप (२.१) |
| ब्रह्मलोकं | ब्रह्मन्–लोक (२.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| प्राप्नुमो | प्राप्नुमः (√प्र-आप् लट् उ.पु. द्वि.) |
| युधि | युध् (७.१) |
| सूदिताः | सूदित (√सूदय् + क्त, १.३) |
| सम्प्राप्नुयामः | सम्प्राप्नुयामः (√सम्प्र-आप् विधिलिङ् उ.पु. द्वि.) |
| कीर्तिं | कीर्ति (२.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| निहत्य | निहत्य (√नि-हन् + ल्यप्) |
| शत्रुम् | शत्रु (२.१) |
| आहवे | आहव (७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | या | म | हे | वा | नि | ह | ताः | पृ | थि | व्या | म |
| ल्प | जी | वि | ताः | दु | ष्प्रा | पं | ब्र | ह्म | लो | कं | वा |
| प्रा | प्नु | मो | यु | धि | सू | दि | ताः | सं | प्रा | प्नु | या |
| मः | की | र्तिं | वा | नि | ह | त्य | श | त्रु | मा | ह | वे |