वायव्यमादाय ततो वरास्त्रं; रामः प्रचिक्षेप निशाचराय ।
समुद्गरं तेन जहार बाहुं; स कृत्तबाहुस्तुमुलं ननाद ॥
वायव्यमादाय ततो वरास्त्रं; रामः प्रचिक्षेप निशाचराय ।
समुद्गरं तेन जहार बाहुं; स कृत्तबाहुस्तुमुलं ननाद ॥
अन्वयः
ततः there upon, रामः Rama, वायव्यम् wind god, महास्त्रम् weapon, आदाय taking निशाचराय night ranger, प्रचिक्षेप severed, तेन his, समुद्गरम् with the mace, बाहुम् from arm, जघान torn, कृत्तबाहुः arm cut off, सः he, तुमुलम् uproarious, ननाद noise.M N Dutt
Then Rāma, taking a trighty Vāyavya weapon, used the same against the night-ranger; and cut off his arm with the mace. And having his arm cut off, he set up tremendousrears.Summary
Thereupon taking up the weapon of Wind God, Rama discharged on the night ranger and severed his right arm with the mace. His arm torn off, Kumbhakarna made uproarious noise.पदच्छेदः
| वायव्यम् | वायव्य (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| वरास्त्रं | वर–अस्त्र (२.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| प्रचिक्षेप | प्रचिक्षेप (√प्र-क्षिप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| निशाचराय | निशाचर (४.१) |
| समुद्गरं | स (अव्ययः)–मुद्गर (२.१) |
| तेन | तद् (३.१) |
| जहार | जहार (√हृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| बाहुं | बाहु (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| कृत्तबाहुस्तुमुलं | कृत्त (√कृत् + क्त)–बाहु (१.१)–तुमुल (२.१) |
| ननाद | ननाद (√नद् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वा | य | व्य | मा | दा | य | त | तो | व | रा | स्त्रं |
| रा | मः | प्र | चि | क्षे | प | नि | शा | च | रा | य |
| स | मु | द्ग | रं | ते | न | ज | हा | र | बा | हुं |
| स | कृ | त्त | बा | हु | स्तु | मु | लं | न | ना | द |