स तस्य बाहुर्गिरिशृङ्गकल्पः; समुद्गरो राघवबाणकृत्तः ।
पपात तस्मिन्हरिराजसैन्ये; जघान तां वानरवाहिनीं च ॥
स तस्य बाहुर्गिरिशृङ्गकल्पः; समुद्गरो राघवबाणकृत्तः ।
पपात तस्मिन्हरिराजसैन्ये; जघान तां वानरवाहिनीं च ॥
अन्वयः
गिरिशृङ्गकल्पः mountain peak, समुद्गरः that mace, राघवबाणकृत्तः by Raghava's arrow, सः he, तस्यबाहुः his arm, तस्मिन् by this, हरिराजसैन्ये monkey king's army, पपात fell, ताम् them, हरिवाहिनीं च Vanara army too, जघान killed.M N Dutt
And his arm with the mace, resembling a mountain-peak, cut off by Rāghava's arrows, fell in the midst of the army of the monkey-king, and destroyed that army,* * This, or course, is not to be taken literally.Summary
Kumbhakarna's arm severed by Rama's arrow was like a mountain peak. It fell on Vanara army too and killed the monkey king's army.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| बाहुर् | बाहु (१.१) |
| गिरिशृङ्गकल्पः | गिरि–शृङ्ग–कल्प (१.१) |
| समुद्गरो | स (अव्ययः)–मुद्गर (१.१) |
| राघवबाणकृत्तः | राघव–बाण–कृत्त (√कृत् + क्त, १.१) |
| पपात | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| हरिराजसैन्ये | हरि–राजन्–सैन्य (७.१) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तां | तद् (२.१) |
| वानरवाहिनीं | वानर–वाहिनी (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त | स्य | बा | हु | र्गि | रि | शृ | ङ्ग | क | ल्पः |
| स | मु | द्ग | रो | रा | घ | व | बा | ण | कृ | त्तः |
| प | पा | त | त | स्मि | न्ह | रि | रा | ज | सै | न्ये |
| ज | घा | न | तां | वा | न | र | वा | हि | नीं | च |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||