अपूरयत्तस्य मुखं शिताग्रै; रामः शरैर्हेमपिनद्धपुङ्खैः ।
स पूर्णवक्त्रो न शशाक वक्तुं; चुकूज कृच्छ्रेण मुमोह चापि ॥
अपूरयत्तस्य मुखं शिताग्रै; रामः शरैर्हेमपिनद्धपुङ्खैः ।
स पूर्णवक्त्रो न शशाक वक्तुं; चुकूज कृच्छ्रेण मुमोह चापि ॥
अन्वयः
रामः Rama, शिताग्रैः sharp pointed, हेमपिनद्धपुङ्खैः gold encrusted, शरैः shafts, तस्य his, मुखम् mouth, अपूरयत् filled, सः he, पूर्णवक्त्रः mouth fully, वक्तुम् mouth, न शशाक not able to speak, कृच्छ्रेण moaned, चुकूज shouted, मुमूर्छचापि fainted.M N Dutt
Then Rama stuffed his mouth full of sharpened shafts having their feathered parts furnished with gold. And having his mouth filled, he could not articulate; but with extreme effort uttered indistinct accents and swooned away.Summary
Rama filled the mouth of Kumbhakarna with his sharp and pointed gold encrusted arrows. Unable to speak the Rakshasa moaned and fainted.पदच्छेदः
| अपूरयत् | अपूरयत् (√पूरय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| मुखं | मुख (२.१) |
| शिताग्रै | शित (√शा + क्त)–अग्र (३.३) |
| रामः | राम (१.१) |
| शरैर् | शर (३.३) |
| हेमपिनद्धपुङ्खैः | हेमन्–पिनद्ध (√पि-नह् + क्त)–पुङ्ख (३.३) |
| स | तद् (१.१) |
| पूर्णवक्त्रो | पूर्ण (√पृ + क्त)–वक्त्र (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| शशाक | शशाक (√शक् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वक्तुं | वक्तुम् (√वच् + तुमुन्) |
| चुकूज | चुकूज (√कूज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कृच्छ्रेण | कृच्छ्र (३.१) |
| मुमोह | मुमोह (√मुह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पू | र | य | त्त | स्य | मु | खं | शि | ता | ग्रै |
| रा | मः | श | रै | र्हे | म | पि | न | द्ध | पु | ङ्खैः |
| स | पू | र्ण | व | क्त्रो | न | श | शा | क | व | क्तुं |
| चु | कू | ज | कृ | च्छ्रे | ण | मु | मो | ह | चा | पि |