अथाददे सूर्यमरीचिकल्पं; स ब्रह्मदण्डान्तककालकल्पम् ।
अरिष्टमैन्द्रं निशितं सुपुङ्खं; रामः शरं मारुततुल्यवेगम् ॥
अथाददे सूर्यमरीचिकल्पं; स ब्रह्मदण्डान्तककालकल्पम् ।
अरिष्टमैन्द्रं निशितं सुपुङ्खं; रामः शरं मारुततुल्यवेगम् ॥
अन्वयः
अथ and then, सःरामः that Rama, सूर्यमरीचिकल्पम् effulgent as sunbeam with feathers, ब्रह्मदण्डान्तककालकल्पम् rod of Brahma and the Time spirit, अरिष्टम् destructive, निशितम् sharp, सुपुङ्खम् fatal to the enemies, मारुततुल्यवेगम् fast as the wind, ऐन्द्रंशरम् Indra's arrow charged with mantra, आददे took.Summary
Then Rama took up the effulgent sun beam like arrow with feathers and the destructive rod of Brahma and the Time spirit that was fatal to enemies that was fast as wind speed and charged with Indra's mantra.पदच्छेदः
| अथाददे | अथ (अव्ययः)–आददे (√आ-दा लिट् प्र.पु. एक.) |
| सूर्यमरीचिकल्पं | सूर्य–मरीचि–कल्प (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| ब्रह्मदण्डान्तककालकल्पम् | ब्रह्मदण्ड–अन्तक–काल–कल्प (२.१) |
| अरिष्टम् | अरिष्ट (२.१) |
| ऐन्द्रं | ऐन्द्र (२.१) |
| निशितं | निशित (√नि-शा + क्त, २.१) |
| सुपुङ्खं | सु (अव्ययः)–पुङ्ख (२.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| शरं | शर (२.१) |
| मारुततुल्यवेगम् | मारुत–तुल्य–वेग (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | द | दे | सू | र्य | म | री | चि | क | ल्पं |
| स | ब्र | ह्म | द | ण्डा | न्त | क | का | ल | क | ल्पम् |
| अ | रि | ष्ट | मै | न्द्रं | नि | शि | तं | सु | पु | ङ्खं |
| रा | मः | श | रं | मा | रु | त | तु | ल्य | वे | गम् |