तद्रामबाणाभिहतं पपात; रक्षःशिरः पर्वतसंनिकाशम् ।
बभञ्ज चर्यागृहगोपुराणि; प्राकारमुच्चं तमपातयच्च ॥
तद्रामबाणाभिहतं पपात; रक्षःशिरः पर्वतसंनिकाशम् ।
बभञ्ज चर्यागृहगोपुराणि; प्राकारमुच्चं तमपातयच्च ॥
अन्वयः
रामबाणाभिहतम् killed by Rama's arrow, तत् that, पर्वतसन्निकाशम् like a mountain, रक्षः Rakshasa शिरः head, पापत fallen, चर्यागृहगोपुराणि homes and peaks of buildings, बभञ्ज demolished, उच्चम् tall, तम् they, प्राकारम् defensive walls, अपातयच्च fell down broken.M N Dutt
And struck with Rāma's arrow, the head of the Rākşasa resembling a hill fell down to the earth; and (in its fall) crushed edifices on the highways and gateways; and elevated walls also it bore down to the ground.Summary
Killed by Rama's arrow, that head of the Rakshasa, which was like a mountain had demolished the walls and houses and peaks of buildings.पदच्छेदः
| तद् | तद् (१.१) |
| रामबाणाभिहतं | राम–बाण–अभिहत (√अभि-हन् + क्त, १.१) |
| पपात | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रक्षःशिरः | रक्षस्–शिरस् (१.१) |
| पर्वतसंनिकाशम् | पर्वत–संनिकाश (१.१) |
| बभञ्ज | बभञ्ज (√भञ्ज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| चर्यागृहगोपुराणि | चर्या–गृह–गोपुर (२.३) |
| प्राकारम् | प्राकार (२.१) |
| उच्चं | उच्च (२.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| अपातयच्च | अपातयत् (√पातय् लङ् प्र.पु. एक.)–च (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्रा | म | बा | णा | भि | ह | तं | प | पा | त |
| र | क्षः | शि | रः | प | र्व | त | सं | नि | का | शम् |
| ब | भ | ञ्ज | च | र्या | गृ | ह | गो | पु | रा | णि |
| प्रा | का | र | मु | च्चं | त | म | पा | त | य | च्च |