तस्मिर्हते ब्राह्मणदेवशत्रौ; महाबले संयति कुम्भकर्णे ।
चचाल भूर्भूमिधराश्च सर्वे; हर्षाच्च देवास्तुमुलं प्रणेदुः ॥
तस्मिर्हते ब्राह्मणदेवशत्रौ; महाबले संयति कुम्भकर्णे ।
चचाल भूर्भूमिधराश्च सर्वे; हर्षाच्च देवास्तुमुलं प्रणेदुः ॥
अन्वयः
ब्राह्मणदेवशत्रौ the enemy of Brahmans and Devatas, महाबले mighty, तस्मिन् his, कुम्भकर्णे Kumbhakarna, संयति having died, हते killed, भूः earth, चचाल mountains, सर्वे all, भूमिधराश्च god of earth, देवाः च Devatas, हर्षात् rejoiced, तुमुलम् highly, विनेदुः uproar.M N Dutt
On that enemy of the Brāhmanas and gods, endowed with immense strength, having been slain in battle, the earth shook and the mountains also; and from excess of joy the celestials shouted aloud.Summary
Kumbhakarna, the enemy of Brahmans and Devatas, having been killed, the Earth, all mountains, Devatas highly rejoiced.पदच्छेदः
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| हते | हत (√हन् + क्त, ७.१) |
| ब्राह्मणदेवशत्रौ | ब्राह्मण–देव–शत्रु (७.१) |
| महाबले | महत्–बल (७.१) |
| संयति | संयत् (७.१) |
| कुम्भकर्णे | कुम्भकर्ण (७.१) |
| चचाल | चचाल (√चल् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भूर् | भू (१.१) |
| भूमिधराश्च | भूमिधर (१.३)–च (अव्ययः) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| हर्षाच्च | हर्ष (५.१)–च (अव्ययः) |
| देवास्तुमुलं | देव (१.३)–तुमुल (२.१) |
| प्रणेदुः | प्रणेदुः (√प्र-नद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | र्ह | ते | ब्रा | ह्म | ण | दे | व | श | त्रौ |
| म | हा | ब | ले | सं | य | ति | कु | म्भ | क | र्णे |
| च | चा | ल | भू | र्भू | मि | ध | रा | श्च | स | र्वे |
| ह | र्षा | च्च | दे | वा | स्तु | मु | लं | प्र | णे | दुः |