ततो विनेदुः सहसा प्रहृष्टा; रक्षोगणास्तं व्यथितं समीक्ष्य ।
प्लवंगमास्तु व्यथिता भयार्ताः; प्रदुद्रुवुः संयति कुम्भकर्णात् ॥
ततो विनेदुः सहसा प्रहृष्टा; रक्षोगणास्तं व्यथितं समीक्ष्य ।
प्लवंगमास्तु व्यथिता भयार्ताः; प्रदुद्रुवुः संयति कुम्भकर्णात् ॥
अन्वयः
ततः then, रक्षोगणाः Rakshasa army, व्यथितम् agonized तम् his, समीक्ष्य perceiving, प्रहृष्टाः happy, सहसा collected, विनेदुः rejoiced, प्लवङ्गमास्तु for Vanaras, व्यथिताः. frightened, भयार्ताः in fear, संयति , कुम्भकर्णात् Kumbhakarna's, प्रदुद्रुवुः fled.M N Dutt
Then, beholding him in torments, Raksasas suddenly rejoiced, emitted shouts; and the monkeys aggrieved and overcome with fright, began to fly Kumbhakarna in battle.Summary
Rakshasa's army collected together rejoiced to see Hanuman agonized. Vanaras were frightened and fled in fear of Kumbhakarna.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| विनेदुः | विनेदुः (√वि-नद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| सहसा | सहस् (३.१) |
| प्रहृष्टा | प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त, १.३) |
| रक्षोगणास्तं | रक्षस्–गण (१.३)–तद् (२.१) |
| व्यथितं | व्यथित (√व्यथ् + क्त, २.१) |
| समीक्ष्य | समीक्ष्य (√सम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| प्लवंगमास्तु | प्लवंगम (१.३)–तु (अव्ययः) |
| व्यथिता | व्यथित (√व्यथ् + क्त, १.३) |
| भयार्ताः | भय–आर्त (१.३) |
| प्रदुद्रुवुः | प्रदुद्रुवुः (√प्र-द्रु लिट् प्र.पु. बहु.) |
| संयति | संयत् (७.१) |
| कुम्भकर्णात् | कुम्भकर्ण (५.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | वि | ने | दुः | स | ह | सा | प्र | हृ | ष्टा |
| र | क्षो | ग | णा | स्तं | व्य | थि | तं | स | मी | क्ष्य |
| प्ल | वं | ग | मा | स्तु | व्य | थि | ता | भ | या | र्ताः |
| प्र | दु | द्रु | वुः | सं | य | ति | कु | म्भ | क | र्णात् |