स कुम्भकर्णस्य वचो निशम्य; व्याविध्य शैलं सहसा मुमोच ।
तेनाजघानोरसि कुम्भकर्णं; शैलेन वज्राशनिसंनिभेन ॥
स कुम्भकर्णस्य वचो निशम्य; व्याविध्य शैलं सहसा मुमोच ।
तेनाजघानोरसि कुम्भकर्णं; शैलेन वज्राशनिसंनिभेन ॥
अन्वयः
सः he, कुम्भकर्णस्य Kumbhakarna's, वचः words, निशम्य hearing, शैलम् mountain, व्याविध्य separating, सहसा forcibly, मुमोच discharged, वज्राशनिसन्निभेन resembling thunderbolt, तेन by that, कुम्भकर्णम् Kumbhakarna, उरसि chest, आजघान dropped.M N Dutt
Hearing Kumbhakarna's speech, Sugrīva whirling that mountain-peak, suddeniy let it go; and with that rock resembling Vajra or the thunder-bolt, smote Kumbhakarņa in the chest.Summary
On hearing Kumbhakarna's words, Sugriva forcibly discharged a mountain resembling a thunderbolt on the chest of Kumbhakarna.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| कुम्भकर्णस्य | कुम्भकर्ण (६.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| निशम्य | निशम्य (√नि-शामय् + ल्यप्) |
| व्याविध्य | व्याविध्य (√व्या-व्यध् + ल्यप्) |
| शैलं | शैल (२.१) |
| सहसा | सहस् (३.१) |
| मुमोच | मुमोच (√मुच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तेनाजघानोरसि | तद् (३.१)–आजघान (√आ-हन् लिट् प्र.पु. एक.)–उरस् (७.१) |
| कुम्भकर्णं | कुम्भकर्ण (२.१) |
| शैलेन | शैल (३.१) |
| वज्राशनिसंनिभेन | वज्र–अशनि–संनिभ (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | कु | म्भ | क | र्ण | स्य | व | चो | नि | श | म्य |
| व्या | वि | ध्य | शै | लं | स | ह | सा | मु | मो | च |
| ते | ना | ज | घा | नो | र | सि | कु | म्भ | क | र्णं |
| शै | ले | न | व | ज्रा | श | नि | सं | नि | भे | न |