ततः समुत्पाट्य जगाम वीरः; संस्तूयमानो युधि राक्षसेन्द्रैः ।
शृण्वन्निनादं त्रिदशालयानां; प्लवंगराजग्रहविस्मितानाम् ॥
ततः समुत्पाट्य जगाम वीरः; संस्तूयमानो युधि राक्षसेन्द्रैः ।
शृण्वन्निनादं त्रिदशालयानां; प्लवंगराजग्रहविस्मितानाम् ॥
अन्वयः
ततः thereafter, वीरः hero, राक्षसेन्द्रः Rakshasa king, तम् his, आदाय taking hold, युधि in battle, संस्तूयमानः praising, प्लवङ्गराजग्रहविस्मितानाम् wondered at Sugriva's capture, त्रिदिवालयानाम् , निनादम् roaring sounds, शृण्वन् hearing, जगाम went.M N Dutt
Thus the lord of Rākşasas went on hearing thanks (from the Rākşasas) and shouts from the lords of the heavens, wondered at the capture of the foremost of monkeys.Summary
Thereafter the heroic Rakshasa king having held Sugriva in the battle went, duly praised (by Rakshasas), hearing the roaring sounds of gods in heaven wondering at Sugriva's capture.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| समुत्पाट्य | समुत्पाट्य (√समुत्-पाटय् + ल्यप्) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वीरः | वीर (१.१) |
| संस्तूयमानो | संस्तूयमान (√सम्-स्तु + शानच्, १.१) |
| युधि | युध् (७.१) |
| राक्षसेन्द्रैः | राक्षस–इन्द्र (३.३) |
| शृण्वन्निनादं | शृण्वत् (√श्रु + शतृ, १.१)–निनाद (२.१) |
| त्रिदशालयानां | त्रिदश–आलय (६.३) |
| प्लवंगराजग्रहविस्मितानाम् | प्लवंग–राजन्–ग्रह–विस्मित (√वि-स्मि + क्त, ६.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | मु | त्पा | ट्य | ज | गा | म | वी | रः |
| सं | स्तू | य | मा | नो | यु | धि | रा | क्ष | से | न्द्रैः |
| शृ | ण्व | न्नि | ना | दं | त्रि | द | शा | ल | या | नां |
| प्ल | वं | ग | रा | ज | ग्र | ह | वि | स्मि | ता | नाम् |