अन्वयः
मारुतात्मज son of Maruti, हनुमान् Hanuman, इत्येवम् in this way, चिन्तयित्वा thinking, अथ then, भूयः said, वानराणाम् to Vanaras, महाचमूम् huge army, संस्तम्भयामास brought determination.
M N Dutt
Thinking thus within himself, Hanumăn, that son of Maruta, began to stay the mighty host of Monkeys.
Summary
Hanuman, the son of Maruti thinking in this way said to the Vanara army and brought determination.
पदच्छेदः
| इत्येवं | इति (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| चिन्तयित्वा | चिन्तयित्वा (√चिन्तय् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| हनूमान्मारुतात्मजः | हनुमन्त् (१.१)–मारुतात्मज (१.१) |
| भूयः | भूयस् (अव्ययः) |
| संस्तम्भयामास | संस्तम्भयामास (√सम्-स्तम्भय् प्र.पु. एक.) |
| वानराणां | वानर (६.३) |
| महाचमूम् | महत्–चमू (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्ये | वं | चि | न्त | यि | त्वा | तु |
| ह | नू | मा | न्मा | रु | ता | त्म | जः |
| भू | यः | सं | स्त | म्भ | या | मा | स |
| वा | न | रा | णां | म | हा | च | मूम् |