स भूतले भीमबलाभिपिष्टः; सुरारिभिस्तैरभिहन्यमानः ।
जगाम खं वेगवदभ्युपेत्य; पुनश्च रामेण समाजगाम ॥
स भूतले भीमबलाभिपिष्टः; सुरारिभिस्तैरभिहन्यमानः ।
जगाम खं वेगवदभ्युपेत्य; पुनश्च रामेण समाजगाम ॥
अन्वयः
भूतले on the ground, भीमबलाभिपिष्टः of dreadful strength, तैः they, सुरारिभिः by enemies of god, अभिहन्यमानः pressed against the ground, सः he, वेगवत् with speed, अभ्युपेत्य bounced, खम् sky, जगाम reached, पुनश्च again, रामेण to Rama, समाजगाम reunited.M N Dutt
Thus pressed upon the ground with main force and severely struck by the enemies of gods, he flew to the skies like a ball-rolling, and once morejoined Rāma.Summary
Dropped on the ground by Kumbhakarna of dreadful strength, pressed against the ground surface, Sugriva bounced to the sky to get reunited with Rama.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| भूतले | भू–तल (७.१) |
| भीमबलाभिपिष्टः | भीम–बल–अभिपिष्ट (√अभि-पिष् + क्त, १.१) |
| सुरारिभिस्तैर् | सुरारि (३.३)–तद् (३.३) |
| अभिहन्यमानः | अभिहन्यमान (√अभि-हन् + शानच्, १.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| खं | ख (२.१) |
| वेगवद् | वेगवत् (२.१) |
| अभ्युपेत्य | अभ्युपेत्य (√अभ्युप-इ + ल्यप्) |
| पुनश्च | पुनर् (अव्ययः)–च (अव्ययः) |
| रामेण | राम (३.१) |
| समाजगाम | समाजगाम (√समा-गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | भू | त | ले | भी | म | ब | ला | भि | पि | ष्टः |
| सु | रा | रि | भि | स्तै | र | भि | ह | न्य | मा | नः |
| ज | गा | म | खं | वे | ग | व | द | भ्यु | पे | त्य |
| पु | न | श्च | रा | मे | ण | स | मा | ज | गा | म |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||