अन्वयः
बर्हिणवाससः adorned by peacock's plumes, तेशराः those arrows, तस्य his, उरसि breast, निमग्नाः lost senses, अस्य his, हस्तात् from hand, परिभ्रष्टा slipped, गदा mace, उर्व्याम् naturally, पपात ह fallen.
Summary
Adorned by peacock's plumes, those arrows slipped into his breast, he lost senses, his mace naturally dropped down from his hand.
पदच्छेदः
| तस्योरसि | तद् (६.१)–उरस् (७.१) |
| निमग्नाश्च | निमग्न (√नि-मज्ज् + क्त, १.३)–च (अव्ययः) |
| शरा | शर (१.३) |
| बर्हिणवाससः | बर्हिण–वासस् (१.३) |
| हस्ताच्चास्य | हस्त (५.१)–च (अव्ययः)–इदम् (६.१) |
| परिभ्रष्टा | परिभ्रष्ट (√परि-भ्रंश् + क्त, १.१) |
| पपातोर्व्यां | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.)–उर्वी (७.१) |
| महागदा | महत्–गदा (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्यो | र | सि | नि | म | ग्ना | श्च |
| श | रा | ब | र्हि | ण | वा | स | सः |
| ह | स्ता | च्चा | स्य | प | रि | भ्र | ष्टा |
| प | पा | तो | र्व्यां | म | हा | ग | दा |