अन्वयः
प्रभो King, त्वम् you, त्रिभुवनस्यासि three worlds, पर्याप्तः conqueror, असि are, सः such you, ईदृशम् this way आत्मानम् yourself, प्राकृतःइव like a common man, कस्मात् allow, शोचसि to wail.
M N Dutt
O lord, you certainly alone are competent to conquer the triple world. Wherefore then did you went such sorrow like an ignoble one?
Summary
"O King! You are a conqueror of the three worlds. Why do you wail like a common man?"
पदच्छेदः
| नूनं | नूनम् (अव्ययः) |
| त्रिभुवनस्यापि | त्रिभुवन (६.१)–अपि (अव्ययः) |
| पर्याप्तस्त्वम् | पर्याप्त (√परि-आप् + क्त, १.१)–त्वद् (१.१) |
| असि | असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| प्रभो | प्रभु (८.१) |
| स | तद् (१.१) |
| कस्मात् | कस्मात् (अव्ययः) |
| प्राकृत | प्राकृत (१.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| शोकस्यात्मानम् | शोक (६.१)–आत्मन् (२.१) |
| ईदृशम् | ईदृश (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नू | नं | त्रि | भु | व | ण | स्या | पि |
| प | र्या | प्त | स्त्व | म | सि | प्र | भो |
| स | क | स्मा | त्प्रा | कृ | त | इ | व |
| शो | क | स्या | त्मा | न | मी | दृ | शम् |