अन्वयः
तदा then, वसुमती earth, विकीर्णैः filled, पर्वताकारैः of mountain like, अभिमर्दितैः crushed, युद्धमदान्वितैः drunk pride of warfare, रक्षोभिः Rakshasas also, पूर्णा fully, आसीत् lying scattered.
Summary
There, the battlefield was filled with mountain like forms of Rakshasas drunk with the pride of warfare, lying scattered all over.
पदच्छेदः
| विकीर्णपर्वताकारै | विकीर्ण (√वि-कृ + क्त)–पर्वत–आकार (३.३) |
| रक्षोभिर् | रक्षस् (३.३) |
| अरिमर्दनैः | अरि–मर्दन (३.३) |
| आक्षिप्ताः | आक्षिप्त (√आ-क्षिप् + क्त, १.३) |
| क्षिप्यमाणाश्च | क्षिप्यमाण (√क्षिप् + शानच्, १.३)–च (अव्ययः) |
| भग्नशूलाश्च | भग्न (√भञ्ज् + क्त)–शूल (१.३)–च (अव्ययः) |
| वानरैः | वानर (३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | की | र्ण | प | र्व | ता | का | रै |
| र | क्षो | भि | र | रि | म | र्द | नैः |
| आ | क्षि | प्ताः | क्षि | प्य | मा | णा | श्च |
| भ | ग्न | शू | ला | श्च | वा | न | रैः |