तस्मिन्प्रवृत्ते तुमुले विमर्दे; प्रहृष्यमाणेषु वली मुखेषु ।
निपात्यमानेषु च राक्षसेषु; महर्षयो देवगणाश्च नेदुः ॥
तस्मिन्प्रवृत्ते तुमुले विमर्दे; प्रहृष्यमाणेषु वली मुखेषु ।
निपात्यमानेषु च राक्षसेषु; महर्षयो देवगणाश्च नेदुः ॥
अन्वयः
प्रवृत्ते as the fight progressed, तस्मिन् their, तुमुले tumultuous, विमर्धे crushed, वलीमुखेषु feeling exultant, प्रहृष्यमाणेषु rejoiced, राक्षसेषु Rakshasas too, निपात्यमानेषु were being struck down, महर्षयः ascetics, देवगणाः Devatas, श्चनेदुः made loud noise.M N Dutt
In that fearful conflict, which was being waged, on the monkeys having been exhilarated and the Rākşasas having been brought down, the Maharsis and the deities sent up shouts.Summary
As the conflict progressed and tumultuous fighting was on, Vanaras were feeling exultant and seeing Rakshasas struck down the ascetics and Devatas made loud noises in joy.पदच्छेदः
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| प्रवृत्ते | प्रवृत्त (√प्र-वृत् + क्त, ७.१) |
| तुमुले | तुमुल (७.१) |
| विमर्दे | विमर्द (७.१) |
| प्रहृष्यमाणेषु | प्रहृष्यमाण (√प्र-हृष् + शानच्, ७.३) |
| वलीमुखेषु | वलीमुख (७.३) |
| निपात्यमानेषु | निपात्यमान (√नि-पातय् + शानच्, ७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| राक्षसेषु | राक्षस (७.३) |
| महर्षयो | महत्–ऋषि (१.३) |
| देवगणाश्च | देव–गण (१.३)–च (अव्ययः) |
| नेदुः | नेदुः (√नद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्प्र | वृ | त्ते | तु | मु | ले | वि | म | र्दे |
| प्र | हृ | ष्य | मा | णे | षु | व | ली | मु | खे | षु |
| नि | पा | त्य | मा | ने | षु | च | रा | क्ष | से | षु |
| म | ह | र्ष | यो | दे | व | ग | णा | श्च | ने | दुः |