ततो हयं मारुततुल्यवेग;मारुह्य शक्तिं निशितां प्रगृह्य ।
नरान्तको वानरराजसैन्यं; महार्णवं मीन इवाविवेश ॥
ततो हयं मारुततुल्यवेग;मारुह्य शक्तिं निशितां प्रगृह्य ।
नरान्तको वानरराजसैन्यं; महार्णवं मीन इवाविवेश ॥
अन्वयः
ततः then, नरान्तकः Naranthaka, मारुततुल्यवेगम् at wind speed, हयम् horse, आरुह्य mounting on top, निशिताम् sharp, शक्तिम् javelin, प्रगृह्य taking hold, मीनः fish, महार्णवम् इव like the ocean, वानरराजसैन्यम् Vanara kingdom army, आविवेश entered.M N Dutt
Then mounted on a charger endued with the celerity of the wind, and grasping a whetted dart, Narāntaka entered into that fierce army of monkeys, like a fish diving into the deep.Summary
Then Naranthaka, mounted on horseback went at wind speed taking hold of javelin and entered Vanara army just as fish entered the ocean.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| हयं | हय (२.१) |
| मारुततुल्यवेगम् | मारुत–तुल्य–वेग (२.१) |
| आरुह्य | आरुह्य (√आ-रुह् + ल्यप्) |
| शक्तिं | शक्ति (२.१) |
| निशितां | निशित (√नि-शा + क्त, २.१) |
| प्रगृह्य | प्रगृह्य (√प्र-ग्रह् + ल्यप्) |
| नरान्तको | नरान्तक (१.१) |
| वानरराजसैन्यं | वानर–राजन्–सैन्य (२.१) |
| महार्णवं | महत्–अर्णव (२.१) |
| मीन | मीन (१.१) |
| इवाविवेश | इव (अव्ययः)–आविवेश (√आ-विश् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ह | यं | मा | रु | त | तु | ल्य | वे | ग |
| मा | रु | ह्य | श | क्तिं | नि | शि | तां | प्र | गृ | ह्य |
| न | रा | न्त | को | वा | न | र | रा | ज | सै | न्यं |
| म | हा | र्ण | वं | मी | न | इ | वा | वि | वे | श |