नरान्तकः क्रोधवशं जगाम; हतं तुरगं पतितं निरीक्ष्य ।
स मुष्टिमुद्यम्य महाप्रभावो; जघान शीर्षे युधि वालिपुत्रम् ॥
नरान्तकः क्रोधवशं जगाम; हतं तुरगं पतितं निरीक्ष्य ।
स मुष्टिमुद्यम्य महाप्रभावो; जघान शीर्षे युधि वालिपुत्रम् ॥
अन्वयः
हतम् killed, पतितम् fallen, तुरङ्गम् horse, निरीक्ष्य observing, नरान्तकः Naranthaka, क्रोधवशम् overcome by anger, जगाम went, महाप्रभावः great power, सः he, मुष्टिम् fist, उद्यम्य raising, युधि battle, वालिपुत्रम् Vali's son, शीर्षे head, जघान struck.M N Dutt
Narāntaka seeing his charger slain and fallen, was seized with a furious wrath, and raising his clenched fist, that one endowed with exceeding great energy in that conflict hit Vāll's son on the head.Summary
Observing the horse fallen, Naranthaka, endowed with great power, overcome by anger raised his fist and struck at the head of Vali's son.पदच्छेदः
| नरान्तकः | नरान्तक (१.१) |
| क्रोधवशं | क्रोध–वश (२.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| हतं | हत (√हन् + क्त, २.१) |
| तुरगं | तुरग (२.१) |
| पतितं | पतित (√पत् + क्त, २.१) |
| निरीक्ष्य | निरीक्ष्य (√निः-ईक्ष् + ल्यप्) |
| स | तद् (१.१) |
| मुष्टिम् | मुष्टि (२.१) |
| उद्यम्य | उद्यम्य (√उत्-यम् + ल्यप्) |
| महाप्रभावो | महत्–प्रभाव (१.१) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शीर्षे | शीर्ष (७.१) |
| युधि | युध् (७.१) |
| वालिपुत्रम् | वालिन्–पुत्र (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | रा | न्त | कः | क्रो | ध | व | शं | ज | गा | म |
| ह | तं | तु | र | गं | प | ति | तं | नि | री | क्ष्य |
| स | मु | ष्टि | मु | द्य | म्य | म | हा | प्र | भा | वो |
| ज | घा | न | शी | र्षे | यु | धि | वा | लि | पु | त्रम् |