अथाङ्गदो वज्रसमानवेगं; संवर्त्य मुष्टिं गिरिशृङ्गकल्पम् ।
निपातयामास तदा महात्मा; नरान्तकस्योरसि वालिपुत्रः ॥
अथाङ्गदो वज्रसमानवेगं; संवर्त्य मुष्टिं गिरिशृङ्गकल्पम् ।
निपातयामास तदा महात्मा; नरान्तकस्योरसि वालिपुत्रः ॥
अन्वयः
अथ now, महात्मा great, वालिपुत्रः son of Vali, अङ्गदः Angada, तदा then, मृत्युसमानवेगम् equalling vehemence of death, गिरिशृङ्गकल्पम् mountain peak, मुष्टिम् fist, संवर्त्य clenching, नरान्तकस्य Naranthaka's, उपिरि top, निपातयामास brought.M N Dutt
Then Vāli's son, the high-souled Angada clenching his fist into a blow resembling Death itself in energy, and like to a mountain-peak, let it descend on the chest of Narāntaka.Summary
Angada clenching his fist, whose vehemence was equal to vehemence of death coming down from the top of the mountain peak, brought down Naranthaka.पदच्छेदः
| अथाङ्गदो | अथ (अव्ययः)–अङ्गद (१.१) |
| वज्रसमानवेगं | वज्र–समान–वेग (२.१) |
| संवर्त्य | संवर्त्य (√सम्-वर्तय् + ल्यप्) |
| मुष्टिं | मुष्टि (२.१) |
| गिरिशृङ्गकल्पम् | गिरि–शृङ्ग–कल्प (२.१) |
| निपातयामास | निपातयामास (√नि-पातय् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) |
| नरान्तकस्योरसि | नरान्तक (६.१)–उरस् (७.१) |
| वालिपुत्रः | वालिन्–पुत्र (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | ङ्ग | दो | व | ज्र | स | मा | न | वे | गं |
| सं | व | र्त्य | मु | ष्टिं | गि | रि | शृ | ङ्ग | क | ल्पम् |
| नि | पा | त | या | मा | स | त | दा | म | हा | त्मा |
| न | रा | न्त | क | स्यो | र | सि | वा | लि | पु | त्रः |