अन्वयः
बाणशतनिर्भिन्नम् broken by hundreds of arrows, तत् thereafter, गिरेःशिरः mountain peak, विदारितशिलातलम् peak of the mountain broken, सविस्फुलिङ्गम् sparks, सज्वालम् flames, निपपात fell.
M N Dutt
That mountain-top on being riven, dropped down, aflame and shooting out sparks of fire.
Summary
Hit by hundreds of arrows, the mountain peak broke into pieces of stones like sparks and flames fell from it.
पदच्छेदः
| तद् | तद् (१.१) |
| बाणशतनिर्भिन्नं | बाण–शत–निर्भिन्न (√निः-भिद् + क्त, १.१) |
| विदारितशिलातलम् | विदारित (√वि-दारय् + क्त)–शिला–तल (१.१) |
| सविस्फुलिङ्गं | स (अव्ययः)–विस्फुलिङ्ग (१.१) |
| सज्वालं | स (अव्ययः)–ज्वाल (१.१) |
| निपपात | निपपात (√नि-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| गिरेः | गिरि (६.१) |
| शिरः | शिरस् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | द्बा | ण | श | त | नि | र्भि | न्नं |
| वि | दा | रि | त | शि | ला | त | लम् |
| स | वि | स्फु | लि | ङ्गं | स | ज्वा | लं |
| नि | प | पा | त | गि | रेः | शि | रः |