ततस्तु नीलः प्रतिलभ्य संज्ञां; शैलं समुत्पाट्य सवृक्षषण्डम् ।
ततः समुत्पत्य भृशोग्रवेगो; महोदरं तेन जघान मूर्ध्नि ॥
ततस्तु नीलः प्रतिलभ्य संज्ञां; शैलं समुत्पाट्य सवृक्षषण्डम् ।
ततः समुत्पत्य भृशोग्रवेगो; महोदरं तेन जघान मूर्ध्नि ॥
अन्वयः
ततः thereafter, नीलःतु Neela also, प्रतिलभ्यसंज्ञाम् regaining senses, सवृक्षषंण्डम् filled with trees, शैलम् mountain, समुत्पाट्य uprooting, ततः then, भृशोग्रवेशः at high speed, समुत्पत्य reaching over, तेन by that, महोदरम् Mahodara, मूर्ध्नि forehead, जघान attacked.M N Dutt
Then that (monkey) possessed of tremendous vehemence, having regained his senses, uprooting a crag with a whole tract of trees, struck it at Mahodara's head.Summary
Thereafter Neela also regained his senses and uprooting a mountain filled with trees went over Mahodara at high speed and attacked him on the forehead.पदच्छेदः
| ततस्तु | ततस् (अव्ययः)–तु (अव्ययः) |
| नीलः | नील (१.१) |
| प्रतिलभ्य | प्रतिलभ्य (√प्रति-लभ् + ल्यप्) |
| संज्ञां | संज्ञा (२.१) |
| शैलं | शैल (२.१) |
| समुत्पाट्य | समुत्पाट्य (√समुत्-पाटय् + ल्यप्) |
| सवृक्षषण्डम् | स (अव्ययः)–वृक्ष–षण्ड (२.१) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| समुत्पत्य | समुत्पत्य (√समुत्-पत् + ल्यप्) |
| भृशोग्रवेगो | भृश–उग्र–वेग (१.१) |
| महोदरं | महोदर (२.१) |
| तेन | तद् (३.१) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| मूर्ध्नि | मूर्धन् (७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्तु | नी | लः | प्र | ति | ल | भ्य | सं | ज्ञां |
| शै | लं | स | मु | त्पा | ट्य | स | वृ | क्ष | ष | ण्डम् |
| त | तः | स | मु | त्प | त्य | भृ | शो | ग्र | वे | गो |
| म | हो | द | रं | ते | न | ज | घा | न | मू | र्ध्नि |