ततः स शैलाभिनिपातभग्नो; महोदरस्तेन सह द्विपेन ।
विपोथितो भूमितले गतासुः; पपात वर्जाभिहतो यथाद्रिः ॥
ततः स शैलाभिनिपातभग्नो; महोदरस्तेन सह द्विपेन ।
विपोथितो भूमितले गतासुः; पपात वर्जाभिहतो यथाद्रिः ॥
अन्वयः
ततः then, शैलेद्रनिपातभग्नः smashed by the impact of the mountain, सःमहोदरः that Mahodara, तेन by that, महाद्विपेन along with elephant, विपोथितः fell, गतासुः released of life, वज्राभिहतः hit by lightning, अद्रिःयथा like a mountain, भूमितले on ground, पपात fell.M N Dutt
Struck by that mighty enemy, Mahodara, broken down by the impetus of that rock, deprived of his senses, dropped down dead on the ground, like a cliff smite with the thunderbolt.Summary
Then smashed by the impact of the mountain, along with his elephant Mahodara's body fell to the ground. Released from life, he fell like a mountain struck with lightning.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| शैलाभिनिपातभग्नो | शैल–अभिनिपात–भग्न (√भञ्ज् + क्त, १.१) |
| महोदरस्तेन | महोदर (१.१)–तद् (३.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| द्विपेन | द्विप (३.१) |
| विपोथितो | विपोथित (√वि-पोथय् + क्त, १.१) |
| भूमितले | भूमि–तल (७.१) |
| गतासुः | गतासु (१.१) |
| पपात | पपात (√पत् लिट् उ.पु. ) |
| वज्राभिहतो | वज्र–अभिहत (√अभि-हन् + क्त, १.१) |
| यथाद्रिः | यथा (अव्ययः)–अद्रि (१.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | शै | ला | भि | नि | पा | त | भ | ग्नो |
| म | हो | द | र | स्ते | न | स | ह | द्वि | पे | न |
| वि | पो | थि | तो | भू | मि | त | ले | ग | ता | सुः |
| प | पा | त | व | र्जा | भि | ह | तो | य | था | द्रिः |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||