स तस्य शीर्षाण्यसिना शितेन; किरीटजुष्टानि सकुण्डलानि ।
क्रुद्धः प्रचिच्छेद सुतोऽनिलस्य; त्वष्टुः सुतस्येव शिरांसि शक्रः ॥
स तस्य शीर्षाण्यसिना शितेन; किरीटजुष्टानि सकुण्डलानि ।
क्रुद्धः प्रचिच्छेद सुतोऽनिलस्य; त्वष्टुः सुतस्येव शिरांसि शक्रः ॥
अन्वयः
क्रुद्धः enraged, सः he, अनिलस्यसुतः wind god's son, तस्य his, कीरीटजुष्टानि along with crown, सकुण्डलानि and earrings, शीर्षाणि three heads (of Vishwarupa), शक्रः Indra, त्वष्टुः Twashsta's, सुतस्य son's, शिरांसिइव three heads like that, शितेन sharp, असिना cut off, प्रचिच्छेद severed.M N Dutt
Then with a sharp sword the wind-god's son cut off his heads decked with diadems and furnished with ear-rings; even as Sakra had severed the heads of Tastri' son.* *Visvarupa.Summary
Enraged wind god's son, cut off the three heads of Trisira adorned with earrings just as Indra cut off the heads of Vishwarupa, son of Twashta.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| शीर्षाण्यसिना | शीर्ष (२.३)–असि (३.१) |
| शितेन | शित (√शा + क्त, ३.१) |
| किरीटजुष्टानि | किरीट–जुष्ट (√जुष् + क्त, २.३) |
| सकुण्डलानि | स (अव्ययः)–कुण्डल (२.३) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| प्रचिछेद | प्रचिछेद (√प्र-छिद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सुतो | सुत (१.१) |
| ऽनिलस्य | अनिल (६.१) |
| त्वष्टुः | त्वष्टृ (६.१) |
| सुतस्येव | सुत (६.१)–इव (अव्ययः) |
| शिरांसि | शिरस् (२.३) |
| शक्रः | शक्र (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त | स्य | शी | र्षा | ण्य | सि | ना | शि | ते | न |
| कि | री | ट | जु | ष्टा | नि | स | कु | ण्ड | ला | नि |
| क्रु | द्धः | प्र | चि | च्छे | द | सु | तो | ऽनि | ल | स्य |
| त्व | ष्टुः | सु | त | स्ये | व | शि | रां | सि | श | क्रः |