अन्वयः
देवदर्पघ्नेः capable of crushing the pride of gods, त्रिभिः all the three, नैरृतेन्द्रः chiefs of Rakshasas अभिद्रुतः marching towards, सः he, अङ्गदः Angada, महाविटपम् huge, वृक्षम् tree, उत्पाटयामास uprooted.
Summary
Angada observed that all the three chiefs of Rakshasas, who were capable of crushing the pride of gods marching towards him and uprooted a huge tree.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| त्रिभिर् | त्रि (३.३) |
| देवदर्पघ्नैर् | देव–दर्प–घ्न (३.३) |
| नैरृतेन्द्रैर् | नैरृत–इन्द्र (३.३) |
| अभिद्रुतः | अभिद्रुत (√अभि-द्रु + क्त, १.१) |
| वृक्षम् | वृक्ष (२.१) |
| उत्पाटयामास | उत्पाटयामास (√उत्-पाटय् प्र.पु. एक.) |
| महाविटपम् | महत्–विटप (२.१) |
| अङ्गदः | अङ्गद (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | त्रि | भि | र्दे | व | द | र्प | घ्नै |
| र्नै | रृ | ते | न्द्रै | र | भि | द्रु | तः |
| वृ | क्ष | मु | त्पा | ट | या | मा | स |
| म | हा | वि | ट | प | म | ङ्ग | दः |