अन्वयः
स्वया his own, गदया mace, भग्नः shattered by, सः he, मत्तः Matta विशीर्णदशनेक्षणः whose eyes had been crushed, तदा then, वज्राहतः struck by lightning, अचलःइव like a mountain, निपपात fallen.
Summary
Shattered by his own mace, Matta (Mahaparsva), whose eyes had been crushed, had fallen like a mountain struck by lightning.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| स्वया | स्व (३.१) |
| गदया | गदा (३.१) |
| भिन्नो | भिन्न (√भिद् + क्त, १.१) |
| विकीर्णदशनेक्षणः | विकीर्ण (√वि-कृ + क्त)–दशन–ईक्षण (१.१) |
| निपपात | निपपात (√नि-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महापार्श्वो | महापार्श्व (१.१) |
| वज्राहत | वज्र–आहत (√आ-हन् + क्त, १.१) |
| इवाचलः | इव (अव्ययः)–अचल (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | स्व | या | ग | द | या | भि | न्नो |
| वि | की | र्ण | द | श | ने | क्ष | णः |
| नि | प | पा | त | म | हा | पा | र्श्वो |
| व | ज्रा | ह | त | इ | वा | च | लः |