तमागतं प्रेक्ष्य तदातिकायो; बाणं प्रदीप्तान्तककालकल्पम् ।
जघान शक्त्यृष्टिगदाकुठारैः; शूलैर्हलैश्चाप्यविपन्नचेष्टः ॥
तमागतं प्रेक्ष्य तदातिकायो; बाणं प्रदीप्तान्तककालकल्पम् ।
जघान शक्त्यृष्टिगदाकुठारैः; शूलैर्हलैश्चाप्यविपन्नचेष्टः ॥
अन्वयः
तदा then, अतिकायः Atikaya, प्रदीप्तान्तककालकल्पम् glowing like the spirit of death, आगतम् coming, तंबाणम् that arrow, प्रेक्ष्य perceiving, अविसन्नचेता with unceasing effort, शक्त्यृष्टिगदाकुठारैः javelins, spears, maces, axes, शूलैः tridents, शरैश्चापि and arrows, जघान struck.M N Dutt
Seeing that shaft flaming and resembling the Fatal destroyer himself, coming, he, exerting himself to the utmost resisted it with darts and Rştis and maces and adzes and javelins and arrows.Summary
Perceiving the glowing arrow coming, like the spirit of death, Atikaya struck it with unceasing effort with javelins, spears, maces, axes, tridents and even arrows.पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| आगतं | आगत (√आ-गम् + क्त, २.१) |
| प्रेक्ष्य | प्रेक्ष्य (√प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| तदातिकायो | तदा (अव्ययः)–अतिकाय (१.१) |
| बाणं | बाण (२.१) |
| प्रदीप्तान्तककालकल्पम् | प्रदीप्त (√प्र-दीप् + क्त)–अन्तक–काल–कल्प (२.१) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शक्त्यृष्टिगदाकुठारैः | शक्ति–ऋष्टि–गदा–कुठार (३.३) |
| शूलैर् | शूल (३.३) |
| हलैश्चाप्यविपन्नचेष्टः | हल (३.३)–च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः)–अविपन्न–चेष्टा (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | मा | ग | तं | प्रे | क्ष्य | त | दा | ति | का | यो |
| बा | णं | प्र | दी | प्ता | न्त | क | का | ल | क | ल्पम् |
| ज | घा | न | श | क्त्यृ | ष्टि | ग | दा | कु | ठा | रैः |
| शू | लै | र्ह | लै | श्चा | प्य | वि | प | न्न | चे | ष्टः |