अन्वयः
यः he who, एषः in that way, कालजिह्वाप्रकाशाभिः gleaming like the tongues of Kala, रथशक्तीभिः with flashes of javelins, आवृतः encircled, विद्युद्भिः lightning, तोयदःइव like a cloud, अतिविराजते shining very bright.
Summary
"Who is he, gleaming like the tongues of time spirit (Kala spirit), with flashes of javelins, encircled with lightning and looking like a cloud shining very bright?"
पदच्छेदः
| कालजिह्वाप्रकाशाभिर् | काल–जिह्वा–प्रकाश (३.३) |
| य | यद् (१.१) |
| एषो | एतद् (१.१) |
| ऽभिविराजते | अभिविराजते (√अभिवि-राज् लट् प्र.पु. एक.) |
| आवृतो | आवृत (√आ-वृ + क्त, १.१) |
| विद्युद्भिर् | विद्युत् (३.३) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| तोयदः | तोयद (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| का | ल | जि | ह्वा | प्र | का | शा | भि |
| र्य | ए | षो | ऽभि | वि | रा | ज | ते |
| आ | वृ | तो | र | थ | श | क्ती | भि |
| र्वि | द्यु | द्भि | रि | व | तो | य | दः |