स राषसेन्द्रो हरिसैन्यमध्ये; नायुध्यमानं निजघान कंचित् ।
उपेत्य रामं सधनुः कलापी; सगर्वितं वाक्यमिदं बभाषे ॥
स राषसेन्द्रो हरिसैन्यमध्ये; नायुध्यमानं निजघान कंचित् ।
उपेत्य रामं सधनुः कलापी; सगर्वितं वाक्यमिदं बभाषे ॥
अन्वयः
सः he, राक्षसेन्द्रः Rakshasa Lord, हरिसैन्यमध्ये in the midst of monkey army, अयुध्यमानम् wielding weapon, कञ्चित् indeed, निजाघान not strike, सधम: कलापी armed with bow and quiver, सः he, उपेत्य taking, रामम् Rama, गर्वितम् with pride, इदम् this, वाक्यम् words, बभाषे spoke.M N Dutt
In the midst of those bands of monkeys, that lord of Raksasas did not slay anyone without battle. And then springing up before Rāma, that one furnished with his bow and quiver, addressed him in haughty words, saying.Summary
The Rakshasa lord, wielding a weapon in the midst of the monkey army, indeed did not strike any, but armed with bow and quiver went with pride towards Rama and spoke.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| राक्षसेन्द्रो | राक्षस–इन्द्र (१.१) |
| हरिसैन्यमध्ये | हरि–सैन्य–मध्य (७.१) |
| नायुध्यमानं | न (अव्ययः)–अयुध्यमान (२.१) |
| निजघान | निजघान (√नि-हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कंचित् | कश्चित् (२.१) |
| उपेत्य | उपेत्य (√उप-इ + ल्यप्) |
| रामं | राम (२.१) |
| सधनुःकलापी | स (अव्ययः)–धनुस्–कलापिन् (१.१) |
| सगर्वितं | स (अव्ययः)–गर्वित (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| बभाषे | बभाषे (√भाष् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | रा | ष | से | न्द्रो | ह | रि | सै | न्य | म | ध्ये |
| ना | यु | ध्य | मा | नं | नि | ज | घा | न | कं | चित् |
| उ | पे | त्य | रा | मं | स | ध | नुः | क | ला | पी |
| स | ग | र्वि | तं | वा | क्य | मि | दं | ब | भा | षे |