रथे स्थितोऽहं शरचापपाणि;र्न प्राकृतं कंचन योधयामि ।
यस्यास्ति शक्तिर्व्यवसाय युक्ता; ददातुं मे क्षिप्रमिहाद्य युद्धम् ॥
रथे स्थितोऽहं शरचापपाणि;र्न प्राकृतं कंचन योधयामि ।
यस्यास्ति शक्तिर्व्यवसाय युक्ता; ददातुं मे क्षिप्रमिहाद्य युद्धम् ॥
अन्वयः
अहम् I, शरचापपाणिः with bow and arrow, रथे chariot, स्थितः seated, प्राकृतम् common warrior, कञ्चन indeed, नयोधयामि not give war, यस्य to him कश्चित् indeed, अस्ति now, व्यवसाययुक्तः whoever is interested, अद्य now इह here, क्षिप्रम् speedily, मे to me, युद्धम् fight, ददातु give me.M N Dutt
Stationed in this car holding the bow and arrows in my hands, I will not fight any that is ignoble. Him that has strength, and that also understand this business, let him today speedily give me battle.Summary
"I am with a bow and arrow seated in the chariot. Indeed, I am not strong in fighting with common warriors. Whoever is interested to fight now can come speedily to fight with me."पदच्छेदः
| रथे | रथ (७.१) |
| स्थितो | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| शरचापपाणिर् | शर–चाप–पाणि (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| प्राकृतं | प्राकृत (२.१) |
| कंचन | कश्चन (२.१) |
| योधयामि | योधयामि (√योधय् लट् उ.पु. ) |
| यस्यास्ति | यद् (६.१)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| शक्तिर् | शक्ति (१.१) |
| व्यवसाययुक्ता | व्यवसाय–युक्त (√युज् + क्त, १.१) |
| ददातु | ददातु (√दा लोट् प्र.पु. एक.) |
| मे | मद् (४.१) |
| क्षिप्रम् | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| इहाद्य | इह (अव्ययः)–अद्य (अव्ययः) |
| युद्धम् | युद्ध (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | थे | स्थि | तो | ऽहं | श | र | चा | प | पा | णि |
| र्न | प्रा | कृ | तं | कं | च | न | यो | ध | या | मि |
| य | स्या | स्ति | श | क्ति | र्व्य | व | सा | य | यु | क्ता |
| द | दा | तुं | मे | क्षि | प्र | मि | हा | द्य | यु | द्धम् |