अन्वयः
ततः then, अतिकायः Atikaya, कुपितः enraged, सायकम् arrows, चापम् to bow, आरोप्य fixing, अम्बरम् sky, सङ्क्षिपम् इव as if discharging it in the sky, लक्ष्मणाय at Lakshmana, प्रचिक्षेप directed.
M N Dutt
Then Atikāya, enraged, setting his arrow on his bow, shot it at Lakşmaņa, as if devouring up the welkin.
Summary
Then enraged Atikaya, fixing his arrow to the bow as if discharging it in the sky directed at Lakshmana.
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽतिकायः | अतिकाय (१.१) |
| कुपितश्चापम् | कुपित (√कुप् + क्त, १.१)–चाप (२.१) |
| आरोप्य | आरोप्य (√आ-रोपय् + ल्यप्) |
| सायकम् | सायक (२.१) |
| लक्ष्मणस्य | लक्ष्मण (६.१) |
| प्रचिक्षेप | प्रचिक्षेप (√प्र-क्षिप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| संक्षिपन्न् | संक्षिपत् (√सम्-क्षिप् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| चाम्बरम् | च (अव्ययः)–अम्बर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | ऽति | का | यः | कु | पि | त |
| श्चा | प | मा | रो | प्य | सा | य | कम् |
| ल | क्ष्म | ण | स्य | प्र | चि | क्षे | प |
| सं | क्षि | प | न्नि | व | चा | म्ब | रम् |