अन्वयः
निशाचरः night ranger, तान् शरान् those arrows, लक्ष्मणाय at Lakshmana, सम्प्रचिक्षेप loosed with force, भरतानुजः Bharata's brother, तान् them, अप्राप्तान् before reaching, शरैः arrows, तीक्ष्णैः sharp, चिच्छेद shattered.
Summary
The night ranger set loose those arrows at Lakshmana, Bharata's brother. Lakshmana shattered them even before it reached him.
पदच्छेदः
| ताञ् | तद् (२.३) |
| शरान् | शर (२.३) |
| सम्प्रचिक्षेप | सम्प्रचिक्षेप (√सम्प्र-क्षिप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| लक्ष्मणाय | लक्ष्मण (४.१) |
| निशाचरः | निशाचर (१.१) |
| तान् | तद् (२.३) |
| अप्राप्ताञ् | अप्राप्त (२.३) |
| शरैस्तीक्ष्णैश्चिछेद | शर (३.३)–तीक्ष्ण (३.३)–चिछेद (√छिद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भरतानुजः | भरत–अनुज (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ता | ञ्श | रा | न्सं | प्र | चि | क्षे | प |
| ल | क्ष्म | णा | य | नि | शा | च | रः |
| ता | न | प्रा | प्ता | ञ्श | रै | स्ती | क्ष्णै |
| श्चि | च्छे | द | भ | र | ता | नु | जः |