ताञ्शरान्युधि संप्रेक्ष्य निकृत्तान्रावणात्मजः ।
चुकोप त्रिदशेन्द्रारिर्जग्राह निशितं शरम् ॥
ताञ्शरान्युधि संप्रेक्ष्य निकृत्तान्रावणात्मजः ।
चुकोप त्रिदशेन्द्रारिर्जग्राह निशितं शरम् ॥
अन्वयः
त्रिदशेन्द्रारि Enemy of Indra, रावणात्मजः Ravana's son, युधि in battle, निकृत्तान् ineffective, तान् शरान् all kinds of arrows, सम्प्रेक्ष्य observing चुपोप angry, निशितम् sharp, शरम् arrow, जग्राह took up.M N Dutt
And finding all those arrows riven in the encounter, that enemy of the lord of the immortals, Ravana's son, was fired with wrath, and took up a whetted shaft.Summary
Ravana's son, an enemy of Indra, observing that all arrows have been ineffective, took up another sharp arrow.पदच्छेदः
| ताञ् | तद् (२.३) |
| शरान् | शर (२.३) |
| युधि | युध् (७.१) |
| सम्प्रेक्ष्य | सम्प्रेक्ष्य (√सम्प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| निकृत्तान् | निकृत्त (√नि-कृत् + क्त, २.३) |
| रावणात्मजः | रावण–आत्मज (१.१) |
| चुकोप | चुकोप (√कुप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| त्रिदशेन्द्रारिर् | त्रिदश–इन्द्र–अरि (१.१) |
| जग्राह | जग्राह (√ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| निशितं | निशित (√नि-शा + क्त, २.१) |
| शरम् | शर (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | ञ्श | रा | न्यु | धि | सं | प्रे | क्ष्य |
| नि | कृ | त्ता | न्रा | व | णा | त्म | जः |
| चु | को | प | त्रि | द | शे | न्द्रा | रि |
| र्ज | ग्रा | ह | नि | शि | तं | श | रम् |