अन्वयः
तेजसा effulgent, संप्रदीप्ताग्रौ flaming with fire, तौ those, उभौ two, बाणौ arrows, क्रुद्धौ angry, भुजंगमौइव serpents like, अन्योन्यम् one another, अम्बरे sky, अभिजघ्नतुः struck violently.
Summary
Both the arrows effulgent, flaming with fire, were like angry serpents in the sky striking one another violently.
पदच्छेदः
| तावुभावम्बरे | तद् (१.२)–उभ् (१.२)–अम्बर (७.१) |
| बाणावन्योन्यम् | बाण (२.२)–अन्योन्य (२.१) |
| अभिजघ्नतुः | अभिजघ्नतुः (√अभि-हन् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| तेजसा | तेजस् (३.१) |
| संप्रदीप्ताग्रौ | संप्रदीप्त (√संप्र-दीप् + क्त)–अग्र (१.२) |
| क्रुद्धाविव | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.२)–इव (अव्ययः) |
| भुजंगमौ | भुजंगम (१.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ता | वु | भा | व | म्ब | रे | बा | णा |
| व | न्यो | न्य | म | भि | ज | घ्न | तुः |
| ते | ज | सा | सं | प्र | दी | प्ता | ग्रौ |
| क्रु | द्धा | वि | व | भु | जं | ग | मौ |