ततोऽतिकायः संक्रुद्धस्त्वस्त्रमैषीकमुत्सृजत् ।
तत्प्रचिच्छेद सौमित्रिरस्त्रमैन्द्रेण वीर्यवान् ॥
ततोऽतिकायः संक्रुद्धस्त्वस्त्रमैषीकमुत्सृजत् ।
तत्प्रचिच्छेद सौमित्रिरस्त्रमैन्द्रेण वीर्यवान् ॥
अन्वयः
ततः then, अतिकायः Atikaya, सङ्कृद्धः seized with anger, त्वाष्ट्रम् Twashta, ऐषीकम् Ishikam, उत्सृजत् discharged, ततः then, वीर्यवान् valiant, सौमित्रिः Saumithri, ऐन्द्रेण presided by Indra, अस्त्रम् arrow, चिच्छेद split.M N Dutt
Then Atikāya wrought up with wrath discharged an arrow called Aişīka dedicated to Tvaştā. Thereat the powerful son of Sumitrā severed that shaft by an Aindra* weapon. *Belonging to Indra.Summary
Then Atikaya seized with anger discharged Ishikam presided over by Twashta (the architect of gods). Saumithri then split the arrow with one presided by Indra and split Ishikam.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽतिकायः | अतिकाय (१.१) |
| संक्रुद्धस्त्वस्त्रम् | संक्रुद्ध (√सम्-क्रुध् + क्त, १.१)–तु (अव्ययः)–अस्त्र (२.१) |
| ऐषीकम् | ऐषीक (२.१) |
| उत्सृजत् | उत्सृजत् (√उत्-सृज् लङ् प्र.पु. एक.) |
| तत् | तद् (२.१) |
| प्रचिछेद | प्रचिछेद (√प्र-छिद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सौमित्रिर् | सौमित्रि (१.१) |
| अस्त्रम् | अस्त्र (२.१) |
| ऐन्द्रेण | ऐन्द्र (३.१) |
| वीर्यवान् | वीर्यवत् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ऽति | का | यः | सं | क्रु | द्ध |
| स्त्व | स्त्र | मै | षी | क | मु | त्सृ | जत् |
| त | त्प्र | चि | च्छे | द | सौ | मि | त्रि |
| र | स्त्र | मै | न्द्रे | ण | वी | र्य | वान् |