अन्वयः
ततः then, निशाचरः night ranger, तत् that, अस्त्रम् arrow, लक्ष्मणाय Lakshmana,चिक्षेप shattered, सःलक्ष्मणः that Lakshmana, तत् that, वायव्येनअस्त्रेण arrow presided by Vayu, निजघान charged.
Summary
Then the night ranger shattered the arrow of Lakshmana and in turn released an arrow presided by Vayu.
पदच्छेदः
| ततस्तद् | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.१) |
| अस्त्रं | अस्त्र (२.१) |
| चिक्षेप | चिक्षेप (√क्षिप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| लक्ष्मणाय | लक्ष्मण (४.१) |
| निशाचरः | निशाचर (१.१) |
| वायव्येन | वायव्य (३.१) |
| तद् | तद् (२.१) |
| अस्त्रं | अस्त्र (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| निजघान | निजघान (√नि-हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| स | तद् (१.१) |
| लक्ष्मणः | लक्ष्मण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | त | स्त | द | स्त्रं | चि | क्षे | प |
| ल | क्ष्म | णा | य | नि | शा | च | रः |
| वा | य | व्ये | न | त | द | स्त्रं | तु |
| नि | ज | घा | न | स | ल | क्ष्म | णः |