अन्वयः
प्रतापवान् heroic, सः he, राक्षसेन्द्रः Rakshasa king, माल्यगन्धपुरस्कृतैः with flowers and fragrance, हविर्लाजसंस्कारैः with parched grain, तत्र then, पावकम् fire, जुहुवे worshipped.
Summary
The heroic Rakshasa king worshipped according to tradition with flowers and fragrance followed by parched grain and fire god.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| हविर्जालसंस्कारैर् | हविस्–जाल–संस्कार (३.३) |
| माल्यगन्धपुरस्कृतैः | माल्य–गन्ध–पुरस्कृत (√पुरस्-कृ + क्त, ३.३) |
| जुहुवे | जुहुवे (√हु लिट् प्र.पु. एक.) |
| पावकं | पावक (२.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| राक्षसेन्द्रः | राक्षस–इन्द्र (१.१) |
| प्रतापवान् | प्रतापवत् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ह | वि | र्जा | ल | सं | स्का | रै |
| र्मा | ल्य | ग | न्ध | पु | र | स्कृ | तैः |
| जु | हु | वे | पा | व | कं | त | त्र |
| रा | क्ष | से | न्द्रः | प्र | ता | प | वान् |