स सैन्यमुत्सृज्य समेत्य तूर्णं; महारणे वानरवाहिनीषु ।
अदृश्यमानः शरजालमुग्रं; ववर्ष नीलाम्बुधरो यथाम्बु ॥
स सैन्यमुत्सृज्य समेत्य तूर्णं; महारणे वानरवाहिनीषु ।
अदृश्यमानः शरजालमुग्रं; ववर्ष नीलाम्बुधरो यथाम्बु ॥
अन्वयः
स्वसैन्यम् his own army, उत्सृज्य leaving, तूर्णम् moving swiftly, महारणे great battle, समेत्य staying, अदृश्यमानः concealed, वानरवाहिनीषु from Vanara army, उग्रम् sharp, शरजालम् arrows of net, नीलाम्बुधरः from the blue sky, अम्बुयथा like rainy cloud, ववर्ष rained.M N Dutt
Then in that encounter, leaving his army, Indrajit became suddenly invisible to the monkey-hosts—and began to shower fierce arrows, like dark clouds pouring rain.Summary
Leaving from his own army space, moving swiftly, remaining concealed in the blue sky like a rain cloud, Indrajith rained a net of arrows.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| सैन्यम् | सैन्य (२.१) |
| उत्सृज्य | उत्सृज्य (√उत्-सृज् + ल्यप्) |
| समेत्य | समेत्य (√समा-इ + ल्यप्) |
| तूर्णं | तूर्णम् (अव्ययः) |
| महारणे | महत्–रण (७.१) |
| वानरवाहिनीषु | वानर–वाहिनी (७.३) |
| अदृश्यमानः | अदृश्यमान (१.१) |
| शरजालम् | शर–जाल (२.१) |
| उग्रं | उग्र (२.१) |
| ववर्ष | ववर्ष (√वृष् लिट् प्र.पु. एक.) |
| नीलाम्बुधरो | नील–अम्बुधर (१.१) |
| यथाम्बु | यथा (अव्ययः)–अम्बु (२.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | सै | न्य | मु | त्सृ | ज्य | स | मे | त्य | तू | र्णं |
| म | हा | र | णे | वा | न | र | वा | हि | नी | षु |
| अ | दृ | श्य | मा | नः | श | र | जा | ल | मु | ग्रं |
| व | व | र्ष | नी | ला | म्बु | ध | रो | य | था | म्बु |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||