ते केवलं संददृशुः शिताग्रा;न्बाणान्रणे वानरवाहिनीषु ।
माया निगूढं च सुरेन्द्रशत्रुं; न चात्र तं राक्षसमभ्यपश्यन् ॥
ते केवलं संददृशुः शिताग्रा;न्बाणान्रणे वानरवाहिनीषु ।
माया निगूढं च सुरेन्द्रशत्रुं; न चात्र तं राक्षसमभ्यपश्यन् ॥
अन्वयः
रणे in war, ते they, वानरवाहिनीषु only Vanara troops, केवलम् alone, सिताग्रान् sharp pointed, बाणान् arrows, सन्ददृशुः saw, आवृतम् covering them, मायाविगूढम् magical power, सुरेन्द्रशत्रुम् enemy of Indra, तंराक्षसम् अपि those Rakshasas also, न अपश्यन् not seen.M N Dutt
In the conflict they could only see sharp pointed shafts among the monkey-ranks, but that foe of the celestial chief-the Raksasas, hidden by virtue of illusion, they could not discover there.Summary
The Vanara troops saw only the sharp pointed arrows covering them. They could not see the enemy of Indra being concealed by magical power.पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| केवलं | केवलम् (अव्ययः) |
| संददृशुः | संददृशुः (√सम्-दृश् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| शिताग्रान् | शित (√शा + क्त)–अग्र (२.३) |
| बाणान् | बाण (२.३) |
| रणे | रण (७.१) |
| वानरवाहिनीषु | वानर–वाहिनी (७.३) |
| मायानिगूढं | माया–निगूढ (√नि-गुह् + क्त, २.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुरेन्द्रशत्रुं | सुर–इन्द्र–शत्रु (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| चात्र | च (अव्ययः)–अत्र (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| राक्षसम् | राक्षस (२.१) |
| अभ्यपश्यन् | अभ्यपश्यन् (√अभि-पश् लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | के | व | लं | सं | द | दृ | शुः | शि | ता | ग्रा |
| न्बा | णा | न्र | णे | वा | न | र | वा | हि | नी | षु |
| मा | या | नि | गू | ढं | च | सु | रे | न्द्र | श | त्रुं |
| न | चा | त्र | तं | रा | क्ष | स | म | भ्य | प | श्यन् |