स शूलनिस्त्रिंश परश्वधानि; व्याविध्य दीप्तानलसंनिभानि ।
सविस्फुलिङ्गोज्ज्वलपावकानि; ववर्ष तीव्रं प्लवगेन्द्रसैन्ये ॥
स शूलनिस्त्रिंश परश्वधानि; व्याविध्य दीप्तानलसंनिभानि ।
सविस्फुलिङ्गोज्ज्वलपावकानि; ववर्ष तीव्रं प्लवगेन्द्रसैन्ये ॥
अन्वयः
सः he, व्याविध्यदीप्तानिलसन्निभानि glowing like fire sacrifice, सविस्फुलिङ्गोज्ज्वलपावकानि flames with sparks of fire, शूलनिस्त्रिंशपरश्वधानिtridents, swords and axes, तीव्रम् violent, प्लवगेन्द्रसैन्ये Vanara army, ववर्ष rained.M N Dutt
And whirling darts and nistraišas and axes, flaming and having the effulgence of fire, and furnished with flames shooting forth sparks, he discharged them furiously at the forces of the sovereign of monkeys.Summary
He rained a violent shower of tridents, swords and axes burning like sacrificial fire shedding flames with fire sparks on the Vanara army.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| शूलनिस्त्रिंशपरश्वधानि | शूल–निस्त्रिंश–परश्वध (२.३) |
| व्याविध्य | व्याविध्य (√व्या-व्यध् + ल्यप्) |
| दीप्तानलसंनिभानि | दीप्त (√दीप् + क्त)–अनल–संनिभ (२.३) |
| सविस्फुलिङ्गोज्ज्वलपावकानि | स (अव्ययः)–विस्फुलिङ्ग–उज्ज्वल–पावक (२.३) |
| ववर्ष | ववर्ष (√वृष् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तीव्रं | तीव्र (२.१) |
| प्लवगेन्द्रसैन्ये | प्लवग–इन्द्र–सैन्य (७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | शू | ल | नि | स्त्रिं | श | प | र | श्व | धा | नि |
| व्या | वि | ध्य | दी | प्ता | न | ल | सं | नि | भा | नि |
| स | वि | स्फु | लि | ङ्गो | ज्ज्व | ल | पा | व | का | नि |
| व | व | र्ष | ती | व्रं | प्ल | व | गे | न्द्र | सै | न्ये |