असौ पुनर्लक्ष्मण राक्षसेन्द्रो; ब्रह्मास्त्रमाश्रित्य सुरेन्द्रशत्रुः ।
निपातयित्वा हरिसैन्यमुग्र;मस्माञ्शरैरर्दयति प्रसक्तम् ॥
असौ पुनर्लक्ष्मण राक्षसेन्द्रो; ब्रह्मास्त्रमाश्रित्य सुरेन्द्रशत्रुः ।
निपातयित्वा हरिसैन्यमुग्र;मस्माञ्शरैरर्दयति प्रसक्तम् ॥
अन्वयः
लक्ष्मण Lakshmana, राक्षसेन्द्रः Rakshasa king, असौ that, सुरेन्द्रशत्रुः enemy of Indra, ब्रह्मास्त्रम् Brahmastram, आश्रित्य secured, हरिसैन्यम् Vanara army, निपातयित्वा having pained, अस्मान् by that, शितैः sharp, शरैः arrows, प्रसक्तम् using that power, अर्दयति tormenting.M N Dutt
O Lakşmaņa, this lord of Rākşasas, this foe of the lord of celestials, having obtained the Brāhma weapon, after having brought down the monkey-hosts, are assailing us with sharpened shafts.Summary
"Lakshmana! Rakshasa king, an enemy of Indra afflicted the Vanaras with the Brahmastram secured by him. Using that power, he is tormenting us with sharp arrows."पदच्छेदः
| असौ | अदस् (१.१) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| राक्षसेन्द्रो | राक्षस–इन्द्र (१.१) |
| ब्रह्मास्त्रम् | ब्रह्मास्त्र (२.१) |
| आश्रित्य | आश्रित्य (√आ-श्रि + ल्यप्) |
| सुरेन्द्रशत्रुः | सुर–इन्द्र–शत्रु (१.१) |
| निपातयित्वा | निपातयित्वा (√नि-पातय् + ल्यप्) |
| हरिसैन्यम् | हरि–सैन्य (२.१) |
| उग्रम् | उग्र (२.१) |
| अस्माञ् | मद् (२.३) |
| शरैर् | शर (३.३) |
| अर्दयति | अर्दयति (√अर्दय् लट् प्र.पु. एक.) |
| प्रसक्तम् | प्रसक्त (√प्र-सञ्ज् + क्त, २.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सौ | पु | न | र्ल | क्ष्म | ण | रा | क्ष | से | न्द्रो |
| ब्र | ह्मा | स्त्र | मा | श्रि | त्य | सु | रे | न्द्र | श | त्रुः |
| नि | पा | त | यि | त्वा | ह | रि | सै | न्य | मु | ग्र |
| म | स्मा | ञ्श | रै | र | र्द | य | ति | प्र | स | क्तम् |